इंसानियत फिर हुई शर्मसार........यूपी पुलिस के ढीले रवैये की वजह से, गयी एक मासूम दलित लड़की की जान........ !!

वैसे यूपी पुलिस गाड़ी पलटाने के लिए जानी जाती है जब से यूपी पुलिस के साथ गाड़ी पलटाने वाला वाकया हुआ है तब से देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में यूपी पुलिस सुर्खियों में आ गयी थी । अब आज एक बार फिर यूपी पुलिस चर्चा में है इस बार चर्चा में आने का विषय उनका ढीला रवैया है....... उनका ढीला रवैया एक मासूम दलित लड़की की तरफ और यूपी पुलिस के इस स्वाभाव से एक भोली भाली लड़की की जान चली जाती है....... कहने को तो यूपी पुलिस ने बड़े बड़े गैंगस्टर्स को दबाकर रखा है लेकिन एक मासूम के साथ ऐसा व्यव्हार क्यों.....? शायद इसलिए की वह दलित है.....?


"आज पूरा हिंदुस्तान पूछ रहा है यूपी पुलिस से की क्या अब गाड़ी नहीं पलटी ?"उल्लेखनीय है की पिछले दिनों यूपी के हाथरस शहर में एक दलित लड़की के साथ गाँव के कुछ दबंगो ने बलात्कार किया था ये वही लोग थे जिन्होने इसी लड़की के पिता को भी प्रताड़ित किया था और उनकी उंगलिया काट दी थी । इस बार इन दरिंदो ने उस लड़की के साथ दुष्कर्म तो किया ही लेकिन उसके पश्चात इस लड़की की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी थी और सूत्रों के हवाले से यह भी पता पड़ा है की उसकी जुबां तक काट दी गयी थी........ !!!


14 सितम्बर को तब उस लड़की के साथ घटना घटी थी जब वो अपनी माँ के साथ खेत में गयी थी।15 दिन तक वो लड़की अपनी ज़िन्दगी से लड़ती रही पुलिस वालो को इशारो में समझाती रही की कैसे यह घटना उसके साथ हुई लेकिन उस बेचारी को क्या मालुम था कि ये नीच पुलिस वाले उसकी शिकायत दर्ज करने में ही गड़बड़ी करेंगे पुलिस इस केस को छेड़छाड़ का बताती रही। शुरुआत में उसे अलीगढ के एक मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया था परन्तु उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी इसलिए उसे आनन फानन में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया और उसकी मौत हो गयी। 


जैसे ही उसकी मौत हुई वैसे ही पुलिस उसका शव गांव लेकर गयी। सुनने में आ रहा है की प्रशानिक अधिकारियो का आदेश था की सूर्योदय होने से पहले उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाए। पीड़िता के परिवारजन और ग्रामीणों के विरोध के बावजूद पुलिस ने उसका रातोरात दाह संस्कार कर दिया। वह रोती बिलखती माँ चीखती रही की वह अपनी बेटी को हल्दी लगाकर विदा करेगी लेकिन उस माँ कि चीखे भी यूपी पुलिस के दिल को नहीं चिर सकी उसका परिवार उसे आखरी बार देख भी नहीं पाया...... !!


 " न जाने कौन हिन्दुस्तानियों को मोमबत्ती पकड़ना सीखा गए वरना नारी सम्मान के लिए तो महाभारत और लंका दहन करने की संस्कृति थी यहाँ के लोगो की.... !"


आये दिन ऐसी घटनाये बढ़ती जा रही है हमारे देश की सरकार को फैसला लेना चाहिए की जो भी ऐसी दर्दनाक घटनाओ को अंजाम देगा उसे बीच चौराहे पर गोली मार दी जाएगी। मौजूदा हालातो को देखते हुए सरकार को जल्द से जल्द एक कड़क क़ानून बनाना पड़ेगा अन्यथा अब जनाक्रोश बड़ी तेज़ी से फ़ैल रहा है न जाने कब, कहाँ और  कैसे जनता का गुस्सा फूटे।


अंततः एक बार फिर इंसानियत शर्मसार हो गयी और इस दुःखद घटना से हर व्यक्ति स्तबध रह गया...