संसार क्यों बौरा रहा है , इतनी प्रतिस्पर्धा किस लिए ? आखिर क्यों ?

श्रीमद भगवद्गीता में लिखा है की मनुष्य खली हाथ आया है और खली हाथ ही  जायगा। यदि हमे यह ज्ञात है की हम मरने के पश्चात् कुछ नहीं लेकर जाएंगे सब यही छूट जाएगा तब फिर किस बात के लिए हम मनुष्यो ने इतनी भागदौड़ मचा रखी है ?



एक वाकया सुनाते है आपको एक घर में एक छोटा बच्चा खेल कूद कर रहा होता है और उस बीच वहाँ आस पडोस का व्यक्ति या कोई रिश्तेदार आया हुआ था , घर में  मजमा लगा हुआ था | बहुत देर बाद जब उन लोगो की " काम की बाते " हो जाती है तब उस बच्चे पर ध्यान जाता है उस व्यक्ति का जो एक स्मार्टफोन में अपनी आशापूर्ण आँखे मोबाइल पर लगा कर गेम खेल रहा था | बच्चा बमुश्किल पांचवी - छठी में पढता था । वह खड़ूस आदमी ज़ोर से जान भूझकर भारी आवाज़ में कहता है कि, "बेटा कुछ सोचा है की नहीं " | बच्चा बोलता है कि,"अंकल अभी तो मोबाइल थोड़ी देर और खेलूँगा फिर खाना खा के सो जाएंगे बस..... "| वहा सोफे पर बैठा हुआ आदमी असहज महसूस करने लग जाता है और कहता है की बेटा  मेरा ये मतलब नहीं था में तुमसे ये बात कह रहा था की जीवन में आगे कुछ सोचा है की नहीं ? बड़े होके क्या बनना चाहते हो ? 11 th में सब्जेक्ट क्या लोगे ?आईआईटी जाओगे की ऐम्स ? ऐसे सवालो को देख वो बच्चा घबरा जाता है और ये बोल के भाग जाता है कि,"मुझे बाथरूम जाना है मैं आता हु "।


कहने का मतलब ये था की आज लोग अपना प्रभाव जमाना चाहते है , एक दबाव बनाना चाहते है प्रतिस्पर्धा को लेकर वहाँ वो आदमी जिसे वो बच्चा ठीक से जानता भी नहीं था उसे ज्ञान देने आया , उसे ये बताने के लिए आया कि बेटा इस स्पर्धात्मक संसार में आपको हमेशा तेज़ दौड़ना पड़ेगा। जहाँ आप ज़रा सा सी भी रुके वहाँ लोग आपको कुचलकर आगे निकल जाएंगे। इस तरह के दबाव से होता कुछ नहीं है बस आप इस जीवन की चक्की में पीसते चले जाते है और इन सबके चक्कर में आपका जीवन नश्वर हो जाता है |  जीवन के कुछ चंद लम्हे आप जी नहीं पाते है.......जीवन भर बस भागदौड़ करते फिरते है। एक दिन आप उस जगह चले जाते है जाहा से आप खाली हाथ आये थे और उसी जगह खाली हाथ चले जाते है | 


अब यहाँ  पर 2  बात आती है कुछ लोग कहते है की हम हमारे बच्चों के लिए कर रहे है....... ये सब उन्ही का तो है..........  उन लोगो के लिए कुछ  कहना चाहता हूँ  कि  चिड़िया जब अपना अंडा देती है और उस चूज़े को पाल पोसकर बढ़ा करती है तब वो उसे कभी भी घोसला बना कर नहीं देती है वो तो बस अपने बच्चो को भोजन का प्रबंध कैसे करते है ये सिखाती है ठीक इसी तरह मनुष्य को भी अपनी संतान को केवल धन कैसे अर्जित करते है ये बताना चाहिए  |  उसके लिए अकूत दौलत ,  महल और ऐशो आराम की ज़िन्दगी कभी नहीं देना चाहिए | 


मानव जीवन में अपने स्वयं के उद्धार के लिए गुरु के बताये ज्ञान को जीवन में धारण कर सत्य और  कर्म की राह  पर चलते हुए निरंतर सद्कर्म करने चाहिए |